क्यों हमारा राज्य सिर्फ खनिज भंडारों के राजस्व पर आश्रित होने की कोशिश करता है हमारा राज्य पर्यटन की असीम संभावनाओं से पूर्ण है गौरव करने वाला इतिहास पृथक व् भव्य सांस्कृतिक पहचान व् मनोरम, आँखों को सुकून व् शांति का अहसास देने वाले प्राकृतिक धरोहरों से लदी पड़ी हमारी इस छ.ग. भूमि धरती में स्वर्ग के सामान है अगर हमारा राज्य चाहे तो धरती के गर्भ को बिना चीरे भी बहुतायत रोजगार व् बहुत सारा राजस्व प्रदान कर सकता है इस हरी भरी धरती की सुंदरता को नष्ट किये बिना भी हमारा राज्य विकास के शिखर पर पहुँच सकता है थोड़े प्रयत्न की आवश्यकता जरूर है परंतु चाहें तो कुछ भी असंभव नहीं । मैं कोरबा से आता हूँ और खनन व् खान के दुष्प्रभाव से भलीभांति भिज्ञ हुँ खनन के बाद जब आप धरती को देखते हैं तो ऐसा लगता है के किसी ने इसे छलनी कर दिया है मैं औद्योगिक विकास का विरोधी नहीं पर आपको वर्तमान वैश्विक दशा में ऐसा विकास चाहिए जो प्रकृति को ज्यादा प्रभावित किये बिना अच्छे परिणाम दे । यूरोप से प्रारम्भ हुई अंधाधुंध औद्योगिक क्रांति के दुष्प्रभाव को समझ आज वहीँ के लोगों द्वारा आज पर्यावरण संरक्षण पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा और वो विश्व में इसका नेतृत्व कर रहा है हमे अपनी आने वाली पीढ़ी को भी कुछ ऐसा विकास देना चाहिए जिसमें उसे हमारे कृत्यों के लिए भुगतना न पड़े । छ. ग. को आवसश्यकता है ऐसे ही विकास की जो औद्योगिक व् खनन राजस्व से विकास पर कम निर्भर हो । We have to Set a example for the other part of the world by doing that . आप दूसरों से बेहतर तब है जब चिंजो को साधारण तरीके से असाधारण रूप में पेश करें । धरती में ईश्वर के वरदान सा हमारा छतीसगढ़ , अब कुछ हट के अतुल्य के साथ विश्वसनीय करने की जरुरत है ...
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